[दीवान]लाइब्रेरी हम-तुम

vineet kumar vineetdu at gmail.com
Fri Jun 7 13:03:48 CDT 2013


अगर आपका मन फेसबुक की टीटीएम( ताबडतोड़ तेल-मालिश), पीएनएपी(
परनिंद-आत्मप्रशंसा) से अघा गया हो और दिन-रात फेसबुक में लिथड़े रहने के
बावजूद हम जैसों को सार्थक,कालजयी और गंभीर लेखन करने की सलाह देते-देते थक गए
हों तो आप इस सोशल साइट्स को ज्वायन कर सकते हैं.
गुडरिड्स एक तरह से ऐसी सोशल साइट हैं जहां हम घर बैठे एक-दूसरे की लाइब्रेसी
से अवगत हो सकेंगे. वर्चुअल स्पेस पर ही सही,किताबों के स्तर पर एक-दूसरे से
जुड़ने की खूबसूरत जगह. हम ये जान सकेंगे कि आपने क्या-क्या पढ़ लिया है, कौन
सी किताब पढ़ना चाहते हैं, क्या खरीदना चाहते हैं, एक-दूसरे की अभिरुचि को
देखते हुए सजेस्ट कर सकते हैं कि आपको क्या पढ़ने चाहिए ? दूसरी तरफ आपके
प्रिय लेखकों( जाहिर है सिर्फ सिंघ, तिवारी,शुक्ला,वाजपेयी,पांडेय आदि नहीं
होंगे) की कौन सी किताब आ रही है, उनके आनेवाले समय में क्या कार्यक्रम होंगे
? उनके प्रमुख मसलों पर क्या वक्तव्य रहे हैं..आदि-आदि. मतलब किताबों में खो
जाने की एक बेहतरीन दुनिया. मैं इस वेबसाइट पर बिल्कुल नया हूं. अपनी एक दोस्त
के सुझाए जाने के बाद मैंने इसे ज्वायन किया लेकिन आपसे साझा किए बिना रहा
नहीं गया. जाहिर है, मैं इस वेबसाइट को लेकर जितना आपको बताने के लिए उत्साहित
हूं, आप शायद पहले से हों और लगेगा कि चिरकुटपंथी की हाइट है, ये भी ब्रेकिंग
न्यूज का शिकार है..लेकिन सब आफकी तरह नहीं होते न जो पिछले दो-तीन सालों से
ये मान चुके हैं कि उनकी नौ ही उंगलियां है, एक उंगली उन्होंने टच स्क्रीन को
डोनेट कर दी है.

http://www.goodreads.com
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