[दीवान]विदेशी पोर्न बैन कर लेने से क्या हो जाएगा ?
vineet kumar
vineetdu at gmail.com
Sun Aug 2 14:54:57 CDT 2015
आप गूगल पर देशी शब्द जैसे ही टाइप करेंगे, न तो देसी घी का लिंक आएगा, न देसी
टमाटर का, न ही चना या देसी ईलाज का..आएगा क्या, एक के बाद एक देसी गर्ल, देसी
पोर्न,देसी मस्ती, देसी एमएमएस...यानी कि इंटरनेट पर देसी और पोर्न एक-दूसरे
के पर्याय हैं...
ऐसे में वर्चुअल स्पेस पर फॉरेन कन्ट्री के पोर्न बैन करके अन्तर्जाल
शुद्धिकरण का दौर चल निकला है तो इसकी आलोचना करने के बजाय, सरकार के नजरिए को
तंग बताकर खिल्ली उड़ाने के बजाय उसकी आर्थिक नीति की सराहना करनी चाहिए..उनका
सीधा सा तर्क है- जब मेक इन इंडिया संभव है तो मेक आउट इन इंडिया क्यों नहीं ?
आखिर जो होना हो, देश के भीतर हो इसमे गलत क्या है मितरों..विदेशी पोर्न देखकर
सिसकारी मारने से तो अच्छा है न कि अपनी संस्कृति की तह में जाकर उर्वरता
हासिल करें...आपलोग झूठ्ठो अर्थशास्त्र की बात को समझे बिना अभिव्यक्ति की
स्वतंत्रता का हनन का मामला बनाने लग जाते हैं...फेंकिए अपनी-अपनी सेल्फ से
मार्शल मैक्लूहान की ग्लोबल विलेज..
देखिए इस देश में जो विदेशी पोर्न बैन किया गया है उसके पीछे राष्ट्र को
आर्थिक रूप से मजबूत करते हुए युवाओं को संस्कार की उंचाईयों तक पहुंचाना है..
योग की तरह भोग भी हमारी विरासत का हिस्सा है, इसे हर एक क्लिकिए को एहसास
कराना है. मेरी इसमे पूरी सहमति है..
लेकिन ये तभी संभव हो सकेगा जब हर किसी के घर की बालकनी मां जगदंबा या भोलेनाथ
के मंदिर की पट की ओर खुलती हो, हर घर की बेडरूम की खिड़कियां नर्सरी की ओर
खुलती हों..लेकिन आलम ये है कि हर दूसरे घर की बालकनी, दूसरे के गुसलखाने की
तरफ और हर तीसरे की बेडरुम की खिड़की पखाने की तरफ खुलती है..जब आपका सिटी
स्पेस ही पार्शियल पोर्न साइट बना है तो वेबसाइट बैन करके क्या कर लोगे, घंटा ?
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