[दीवान]Fwd: हीरा भोजपुरी का हेराया बाज़ार में

Ravikant ravikant at sarai.net
Tue Aug 11 02:38:01 CDT 2015


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From: Rajeev Ranjan Giri <rajeev.ranjan.giri at gmail.com>
Date: 2015-08-08 9:48 GMT+05:30

भोजपुरी भाषी इलाके के सांस्कृतिक, नवजागरण के अग्रदूत भिखारी ठाकुर की
शख्सियत को संजीव ने दलित-पिछड़ी जातियों का प्रतीक-पुरुष बनाने की कोशिश की
है. संजीव के इस कलात्मक प्रयास से ‘दलित-पिछड़ी राजनीति को एक मजबूत प्रतीक
तो मिल गया परन्तु भिखारी ठाकुर का व्यापक दाय और उनकी बहुमुखी शख्सियत का
दायरा सिमट गया.

इस लिहाज से, संजीव का सूत्रधार सफल भी है और असफल भी. सफल इस अर्थ में, कि
जिस राजनीतिक इरादे और अस्मितापरक विमर्शों का ‘सूत्रधार’ संजीव ने रचा है,
उससे दलित-पिछड़ी जाति-अस्मिता के लिए एक ‘सांस्कृतिक’ प्रतीक की
सर्जनात्मक-औपन्यासिक निर्मिति सामने आयी है. प्रतीक-निर्माण के इस दौर में,
अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय रहे पुरखों को कतर-ब्योंत कर, काट-छाँट कर,
अपने-अपने वैचारिक नजरिये के उपयुक्त सृजित करने की परम्परा पल्लवित पुष्पित
हो रही है. इस प्रक्रिया में पुरखों के देश-काल और चरित्र को, अपने
वैचारिक-विमर्श के औचित्य के  अनुकूल गढ़ा जा रहा है. जाहिर है इतिहास के उस
दौर और पूर्वज के व्यक्तित्व का जो पहलू, ऐसे रचनाकारों के वैचारिक दृष्टिकोण
के लिहाज से ‘पॉलिटिकली करेक्ट’ और वर्तमान के अनुकूल नहीं होते, उसे या तो
नजरअन्दाज किया जाता है अथवा ऐसे कील-काँटों को खराद कर, रुचिकर बनाने की
हिकमत की जाती है. अलबत्ता संजीव एक मँजे हुए रचनाकार हैं, लिहाजा उनकी
कलात्मकता ‘सूत्रधार’ को विश्वसनीय मनवाने की सफल कोशिश करती है. इस मायने में
‘सूत्रधार’ सफल कृति है.

यह उपन्यास असफल इस अर्थ में है कि एक ऐसा व्यक्ति, जिसने व्यक्तिगत संघर्ष के
जरिये, अपनी कला को स्थापित किया, लोगों के बीच स्वीकृति पायी और परिणामस्वरूप
उस जमाने में, भोजपुरी भाषियों का सांस्कृतिक अगुआ बना– उसकी शख्सियत को संजीव
ने महदूद करने की रचनात्मक कोशिश की है. दरअसल, संजीव की अवधारणात्मक समझ – कि
उपन्यास में द्वन्द्व और दुविधा की गुंजाइश नहीं होती – का नतीजा है कि
इन्होंने भिखारी ठाकुर के बहुस्तरीय और बहुआयामी संघर्ष को एकस्तरीय और
एकायामी बनाकर बेहद सँकरा कर दिया है. यह संजीव की तंगनजरी का प्रमाण है और
परिणाम भी.

इस आलोचनात्मक निबंध को पूरा पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक को चटकाएं।

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