[दीवान]राष्ट्र निर्माण हेतु एकमात्र मोबाईल फोन

vineet kumar vineetdu at gmail.com
Mon Nov 30 07:35:07 CST 2015


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आप राष्ट्र निर्माण हेतु आरएसएस और उसके नक्शे-कदम पर चलनेवाली विश्व हिन्दू
परिषद्, बजरंग दल, संस्कार भारती, संस्कृत भारती, विद्या भारती, वनवासी कल्याण
आश्रम, धर्म जागरण मंच जैसे संगठन में जाएंगे तो आपको बाकायदा एक लिस्ट
मिलेगी. उस लिस्ट में स्वदेशी और विदेशी वस्तुओं का स्पष्ट विभाजन होगा. ये
लिस्ट इसलिए दी जाती है ताकि आप सिर्फ उन वस्तुओं का उपभोग करें जिससे कि इस
देश के पूंजीपति, व्यापारियों के हित को बढ़ावा मिले. इसे वो स्वदेशी कहते
हैं. लेकिन मैंने बहुत करीब से देखा है कि साबुन-तेल-कंघी तक तो मामला सही
चलता है लेकिन

मामला म्यूजिक सिस्टम पर जाकर, कई बार चड्डी पर, कई बार दवाईयों पर जाकर
गड़बड़ा जाता है. मोबाईल में तो सबसे ज्यादा. अब एप्पल कश्मीर में भले फलते
हों, उसके मोबाईल तो यहां के नहीं है.. अच्छा, एक स्तर पर जाकर ये लिस्ट कारगर
साबित नहीं होती. कई वस्तुएं इस्तेमाल तो की जाती हैं लेकिन उसकी चर्चा इसमे
नहीं होती और न ही स्वेदशी-विदेशी का विभाजन ही.
इस तस्वीर से गुजरा तो लगा कि हमारे प्रधानसेवक ने राष्ट्र निर्माण में लगे उन
तमाम भक्तों की चयन की इस दुविधा को कितनी सहजता से दूर कर दी. सेल्फी लेने का
सबसे बड़ा लाभ ये है कि मोबाईल कंपनी स्पष्ट दिखाई देती है और फिर प्रधानसेवक
इतने सधे हाथों से सेल्फी लेते हैं कि कंपनी का नाम चांद की तरह अलग से झांक
रहा होता है. तो आगे से मोबाईल किस ब्रांड का हो, ये दुविधा भक्तों के लिए
खत्म.

इसे कहते हैं आंतरिक पीड़ा को समझते हुए समस्या का समाधान करना.

मैं एचटीसी की ब्रांडिंग देख रहा होता तो सारी डील कैंसिल करके नए विज्ञापन
लांच करता- एचटीसी मोबाईल, नो स्पेस फॉर सेल्फिश इसके आगे नोकिया- कनेक्टिंग
इंडिया, सौ कोस पीछे रह जाएगा.

तस्वीर साभारः http://qz.com/…/the-strange-case-of-modi-and-the-media-no-…/
<http://qz.com/561306/the-strange-case-of-modi-and-the-media-no-to-questions-yes-to-selfies/>
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