[दीवान]इतनी भी अंधेरगर्दी मत मचाइए महाराज

vineet kumar vineetdu at gmail.com
Sun Oct 4 08:16:01 CDT 2015


संदर्भ ‪#‎abp‬
<https://www.facebook.com/hashtag/abp?source=feed_text&story_id=10207406629941638>
न्यूज
का बेजा इस्तेमाल

<http://2.bp.blogspot.com/-kTrEwMya4Gc/VhEmXUk0XUI/AAAAAAAARts/Sb78vB9cE3E/s1600/Screen%2BShot%2B2015-10-04%2Bat%2B6.10.13%2Bpm.png>

एबीपी न्यूज की इस स्टिल को देखकर किसे समझ नहीं आ जाएगा कि नीचे जो फ्लैश
चिपकाए हैं, वो किसी ने पेंट में ले जाकर खुद से टाइप किया है. हमने न्यूज
चैनलों में काम किया है और इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं कि किसी भी चैनल
के लिए लिखावट की शैली( फांट) को चुनना, बदलना कोई अचानक का मामला नहीं होता.
उसके पीछे बाकायदा स्ट्रैटजी होती है. आप कभी भी इस तरह
स्लग,सुपर,एस्टर्न,टिक्कर के लिए मनमाने ढंग से फांट का चुनाव नहीं कर सकते.

विजयजी, आपको मेरे लिखे पर चाहे जो भी असहमति हो, वैचारिक स्तर पर जो लिखना
चाहें, लिखें लेकिन इतनी अंधेरगर्दी न मचाएं कि आपका कहा शातिराना हरकत करार
देने लग जाए. बाहर की दुनिया में जो और जैसा हो रहा है, आप और हम सब देख रहे
हैं. यहां तो कम से कम लिखने-पढ़ने, विमर्श की गुंजाईश रहने दीजिए. ये कौन सी
मुश्किल बात है, ये पता करना कि एबीपी न्यूज कब ऐसी स्टोरी चलायी है. होंगे
आपके कुछ अनुचर, समर्थक जो आपकी इस बात पर ज्यों की त्यों यकीन कर लेंगे लेकिन
जिन्हें तकनीक की रत्तीभर भी समझ होगी वो इतना तो जरूर कहेगा- कानून को अपने
हाथ में लेने के साथ-साथ तकनीक को अपने हाथ की कठपुतली बनाना दहशतगर्दी माहौल
को बढ़ावा देगा. चलते-चलते न्यूज की स्पेलिंग तो सही लिख देते.

न्यूज चैनल तो पहले से भी बहुत भरोसमंद नहीं रहे हैं..आज न कल उनका ये होना ही
था. लेकिन आप-हम पेंट और फोटोशॉप से उसे इस हाल में लाकर क्यों छोड़ देना चाह
रहे हैं कि लोग टीवी कनेक्शन कटवाने पर मजबूर हो जाएं. उन्हें भी रहने दीजिए,
जिंदगी की शोभा बनी रहती है. रही बात पार्टी की तो एक लेखक,
पत्रकार,टिप्पणीकार का काम हमेशा सत्ता के विपक्ष में खड़ा होना है..इस बात की
चिंता किए बिना कि किस पार्टी की सरकार है.
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