[दीवान]हम जूली के घर आपके लिए भागकर जाते थे निदा फाजली साहबः

vineet kumar vineetdu at gmail.com
Mon Feb 8 11:29:38 CST 2016


निदा साहब ! आप मेरे फेसबुक दोस्तोंके दिल के कितने करीब थे, अजीज थे..इसका
अंदाजा मैं उन सबकी टाइमलाइन से गुजरकर लगा रहा हूं. हर दूसरा दोस्त आपकी
नज्मों को, गजलों को, आपके साथ की मुलाकात को अपने तरीके से याद कर रहा है.
मेरी आपसे कोई मुलाकात नहीं रही और सच कहूं तो मैं अपने बाकी दोस्तों की तरह
गानों का पॉलिश्ड श्रोता नहीं हूं. मैं अपने फुर्सत के पलों में गजलें नहीं,
सुनते हैं जब प्यार होता, दिए जल उठते हैं( प्रेम रतन धन पायो) टाइप के गाने
सुनता हूं. इन गानों को सुनते हुए मैं महसूस करता हूं हमारी भावनाओं की
लेटेस्ट बत्ती बनाकर बाजार में कैसे टांगी जाती है.

आपको मैंने बहुत कम सुना है और गर सुना भी है तो इस अंदाज में नहीं कि आपके
लिखे शब्दों पर मर मिट जाऊं. फैन की तरह तो बिल्कुल भी नहीं..सो जैसे मेरे
बाकी के दोस्त आपके शब्दों के बेहद करीब होने के दावे पेश कर रहे हैं, मैं
नहीं कर सकता. मैंने कहा न कि गाने मैं मनोरंजन और मन को छूने के लिए कम,
इमोशन्स की लेटेस्ट बत्ती को समझने के लिए ज्यादा सुनता हूं. लेकिन

एक बात कहूं, आप यकीन करेंगे ? मैंने आपकी लिखी नीम का पेड की टाइटल ट्रैक कभी
मिस नहीं किया. जब ये सीरियल दूरदर्शन पर आया, मेरे घर टेलीविजन सेट नहीं था.
देश में उदारवाद हौले-हौले आ रहा था लेकिन पापा को उदार होने में चार-पांच साल
और लग गए. हम उनकी निगाह में पहले से ही बिगड़े थे, टीवी आने से तो भटियारा हो
जाते. लिहाजा, टीवी घर का सदस्य नहीं बना लेकिन हम इसके दर्शक बहुत पहले बन
चुके थे. रामायण, महाभारत को लेकर उनकी चुप्पी ने मेरे हौसले को बढ़ा दिया था
और हम चित्रहार तक जूली के घर जाकर देखने की हिम्मत जुटाने लग गए थे.

इसी कड़ी में नीम का पेड का चस्का लगा. चूली का घर मेरे घर से बिल्कुल पास था.
टीवी की आवाज थोड़ी-थोड़ी सुनाई पड़ती..टी टी टी टी टी शुरू होता नहीं की हम
एकदम देह छोड़कर भागते और फिर आपके शब्द-
मुंह की बात, सुने हर कोई, दिल के दर्द को जाने कौन
आवाजों के बाजारों में, खामोशी पहचाने कौन...

मुझे नहीं पता कि उस वक्त आपके शब्दों का मुझ पर ज्यादा असर था या फिर जगजीत
सिंह के स्वर का लेकिन टी-टी-टी सुनते ही बेतहाशा पूरी टाइटल ट्रैक को सुनने
के लिए बेतहाशा जरूर भागता. कितनी बार सुना लेकिन बाद में ऐसा होते देखने लगा.
लोगों को भागते हुए, सबकुछ बोलकर भी खामोश हो जाते हुए..हम आज भी कहां आपकी
खामोशी को पहचान पा रहे हैं..

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Neem Ka Ped (Title Song) - Muh Ki Baat Sune Har Koi - Jagjit Singh - On
Doordarshan
<https://www.facebook.com/l.php?u=https%3A%2F%2Fwww.youtube.com%2Fwatch%3Fv%3DB4eLE3Um1jU&h=KAQEEOmzC&enc=AZMW0BcQDQ9LbR7dNzpHbEhwgoivGg40TKK8SHMZlq7ry4BlXPRAvulJHJ8URgXhZxLRgEyXLAKWj7cAzzmxPGKiJkGev0b8olIGt2LkLvyYFTTaEFu1hxql7UUon3IJRk0j_vXDyUsbZUmmZR6O_XFC460s32l73K52oldlOwkhGGA2bx947HZuMiohY0sqDTU&s=1>
Muh Ki Baat Sune Har Koi (Neem Ka Ped Title Song) TV Serial: Neem Ka Ped
(On Doordarshan) Based on…
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