[दीवान]अबकी बार तहलका की दो प्रति खरीदिए

vineet kumar vineetdu at gmail.com
Fri Jun 10 06:26:46 CDT 2016


मुझे नहीं पता कि आपने अबकी बार तहलका की कितनी प्रति खरीदी है..लेकिन शुरु से
आखिर तक के पन्ने चाट लेने के बाद मैं आपको सलाह दूंगा कि कम से कम इस अंक की
दो प्रति जरूर खरीदिए.

एक तो अपने लिए जो आगे सोशल मीडिया पर गंभीरता से बात करने, उसके विविध पहलुओं
पर समझने के काम आएंगे और दूसरा उन महान आत्मओं को पुरस्कार स्वरूप भेंट करने
के लिए जो खुद तो सोशल मीडिया पर या तो नजर नहीं आते या चुप्पा रीडर होते हैं
र हमसे-आपसे ज्यादा बेचैन रहते हैं. किसी को किसी ने गाली दे दी, किसी ने किसी
को रगड़ दिया तो आगे क्या हुआ, ये सब किसी थ्रिलर की तरह जानने की उनके बीच
उत्कंठा बनी रहती है.

ये आत्माएं जब मुझे फोन करके पूछती हैं- हां भईया, ये बंदे का क्या मामला है
कि लोग पिल पड़े हैं तो आवाज से ही लगता है कि बिना किसी लागत और रिस्क की
उन्हें कितनी गुदगुदी हो रही होगी ? आगे से उन्हें फोन पर राय-सलाह देने के
बदले मेरी तरह आप भी कहिएगा- अगले तहलका के सोशल मीडिया विशेषांक का इंतजार
कीजिए या फिर जो फेसबुक पर सक्रिय लोग आपको दिमागी गुंड़़े नजर आते हैं, आप इस
गिरोह में शामिल हो लीजिए..बहरहाल

इस अंक की दो प्रति खरीदने के साथ मुझे टिप्पणी के तौर पर बस इतना ही जोड़ना
है कि कभी संभव हो तो पत्रिका वाररूम की गुंडागर्दी विशेषांक निकाले. ऐसा
इसलिए कि हममे से ज्यादा लोगों को गलतफहमी रहा करती है कि सोशल मीडिया की
गुंडागर्दी व्यक्तिगत स्तर का मामला है जबकि सच्चाई ये है कि विभिन्न राजनीतिक
दल, दबंग चेहरे बाकायदा इसके लिए वॉररूम बनवाकर ऐसा कर रहे हैं, फेसबुक,
ट्विटर अपडेट करने, अश्लील टिप्पणी और घिनौनी भाषा का इस्तेमाल करने के लिए
पत्रकारिता के उन्हीं छात्रों को हायर कर रहे हैं जिन्होंने कभी क्लासरूम में
मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मानकर लिखना-पढ़ना शुरू किया था.
[image: Vineet Kumar's photo.]
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