[दीवान]जब माँ गंगा के लिए नेहरू जी ने सत्याग्रह का झंडा बुलंद किया

kamal mishra kissakhwar at gmail.com
Sun Nov 13 12:08:58 CST 2016


इस तथ्य की जानकारी आमतौर से बहुत कम लोगों को ही है कि जवाहर लाल नेहरू जी ने
कभी औपनिवेशिक शासन के दौरान हिन्दू आस्था की प्रतीक माँ गंगा के लिए प्रयाग
की धरती पर सत्याग्रह का झंडा भी बुलंद किया था। उस आंदोलन को इतिहास के
पन्नों में प्रयाग सत्याग्रह के नाम से भी जाना जाता है। इस प्रयाग
सत्याग्रह की कहानी भी अपने आप में कोई कम रोचक नहीं है। और यह ऐतिहासिक
प्रसंग असल में 1924 का है। जब प्रयाग में अर्द्धकुंभ होना था। इसी बीच
अचानक गंगा नदी की धारा में कुछ परिवर्तन देखा गया। जिसके बाद स्थानीय
अधिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत के आदेश से त्रिवेणी संगम, यानी वो जगह जहाँ
नदियां आपस में मिलती हैं, पर श्रद्धालुओं के स्नान पर पूरी तरह से रोक लगाने
की घोषणा कर दी। तब हिन्दू मानस के लिए ऐसे पर्व पर गंगा स्नान के महत्व
को देखते हुए पहले तो पं. मदन मोहन मालवीय जी ने अपने तईं अंग्रेजी हुकूमत से
त्रिवेणी स्नान पर लगी रोक हटाने के लिए एक लिखित निवेदन भेजने का फैसला किया।
मगर जब सरकार ने उस मांग को अनदेखा कर दिया तो बाद में सर्वसम्मति
से सत्याग्रह करने का निर्णय लिया गया। जिसके पश्चात जवाहर लाल नेहरू अपने
नेतृत्व में लगभग 200 सत्याग्रहियों को ले कर त्रिवेणी संगम जा पहुंचे। मदन
मोहन मालवीय जी भी उस वक्त उनके साथ ही थे। सत्याग्रहियों ने वहां पहुँचने पर
देखा कि कुंभ मेले की व्यवस्था सँभालने वाले प्रशासनिक अधिकारी ने इस बीच ऐन
संगम पर बाँस का एक मजबूत घेरा खड़ा कर रखा है ताकि आंदोलनकारी संगम तक न
पहुँचने पायें। मगर वहां तैनात घुड़सवार पुलिस का दस्ता भी जवाहर लाल नेहरू को
नहीं रोक सका। और वो बड़ी फुर्ती से हाँथ में कांग्रेस का झंडा थामे घुड़सवारों
के बीच से दौड़ते हुए बल्लियों के अवरोध पर जा चढ़े। उनकी इस त्वरित कार्यवाही
से मालवीय जी भी जोश से भर उठे। और वे भी झपटकर नेहरू जी के पास जा पहुँचे। बस
फिर क्या था देखते ही देखते बाकी के सत्याग्रही साथियों ने भी अवरोधक को पार
कर गंगा में डूबकी लगाना शुरू कर दिया। जिसका नतीजा ये हुआ कि अंग्रेजी हुकूमत
की ओर से तैनात पुलिस के जवान भी कुछ देर इधर उधर हाँथ-पाँव भांजने के
बाद लाचार हो कर वहां से हट गए। और इस तरह माँ गंगा के लिए नेहरू जी के
नेतृत्व में हुआ ऐतिहासिक सत्याग्रह सफलता से संपन्न हुआ।


*A nation's treasure is its scholars. --- Yiddish proverb*
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