[दीवान]अलविदा सुधीरजी ! वैसे ऐसे वक्त में आपकी हमें जरूरत ज्यादा थी.

vineet kumar vineetdu at gmail.com
Sat Feb 6 13:30:20 CST 2016


सुधीर तैलंग से वो मेरी पहली और आखिरी मुलाकात थी. राज्यसभा टेलीविजन ने अपने
खास कार्यक्रम सरोकार में हमें असीम त्रिवेदी के कार्टून और उन पर देशद्रोह का
मुकदमा चलाए जाने के विवाद को लेकर बातचीत के लिए बुलाया था. वैसे तो सुधीरजी
के कार्टून को देखते-समझते हुए हम बड़े हुए हैं लेकिन बिल्कुल आमने-सामने से
कार्टून और देश की मौजूदा हालत पर बोलते हुए पहली बार सुन रहा था.

सुधीरजी ने एक अनुभवी कार्टूनिस्ट की हैसियत से अपनी बात रखी और मैंने ब्लॉगर
के नाते अपने अनुभव साझा किए लेकिन हमदोनों की बात में समानता ये थी कि असीम
त्रिवेदी के कार्टून को लेकर सवाल उठाए जा सकते हैं( बल्कि कुछ ज्यादा ही तल्ख
था) लेकिन इसके लिए देशद्रोह ? ये ज्यादती नहीं, आपातकाल जैसी स्थिति है. उस
वक्त यूपीए-२ की सरकार थी और अब हम जो कांग्रेस के पिठ्ठू करार दिए जाने लगे
हैं, इस रवैये के सख्त खिलाफ थे. खैर

शो खत्म हुआ. हमलोग बाहर आए और चलते-चलते जो थोड़ी बात हुई वो ये कि अब आप नए
लोगों को ही अभिव्यक्ति की आजादी जैसे सवाल और गहराते संकट से जूझना है. वो इस
बात को बार-बार दोहरा रहे थे कि पिछले तीस साल में उन्हें ये स्थिति नहीं देखी
जो अब देख रहे हैं. आपने अच्छा बोला, कोशिश कीजिए कि यहां से जाकर एक लेख भी
लिख दीजिए.

हम वापस घर आ गए. उन्हें ट्विटर पर फॉलो करने लगा. उनके कार्टून के साथ-साथ
कमेंट से भी अवगत होने लगा. अब जब उनके न रहने की खबर सुना तो अवाक् रह गया.
इतनी कम उम्र में ? उन्हें जब यूपीए-२ का कार्यकाल भी इमरजेंसी से बदतर लग रहा
था तो अब आगे की स्थिति को वो क्या करार देते. उनका आज के दौर में होना ज्यादा
जरूरी था. बहुत कम ऐसे लोग होते हैं जिनसे मैं एक-दो मुलाकात में प्रभावित हो
पाता हूं. उनके काम से प्रभावित होने के बावजूद भी जरूरी नहीं कि वो इंसान
मुझे अपनी ओर खींच पाए. सुधीरजी, आपसे मिलकर मुझे ऐसा लगा था..बिल्कुल बेबाक,
दो टूक अपनी बात कहनेवाला इंसान..कितने बेहतरीन कार्टूनिस्ट थे आप, ये तो आपके
काम का विश्लेषण है..याद आती रहेगी वो पहली और आखिरी मुलाकात..

https://www.youtube.com/watch?v=dTNq0jGm_xw
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[image: Vineet Kumar's photo.]
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